आज बहुत दिनों के बाद कुछ लिखने का मन किया।
टॉपिक का नहीं पता..... पर कुछ लिखना चाहती हूं।
मन बहुत उदास हैं। सब कुछ होते हुए भी बहुत अकेलापन सा लग रहा है।
कभी कभी होता हैं आप बहुत कुछ कहना बोलना चाहते हो लेकिन सुनने वाला समझने वाला कोइ ना हो।
ना किसी से बात करने का मन हैं। ना किसी काम में मन लग रहा है ।
आज सच में मन कर रहा है कही बहुत दूर चली जाऊ। जहां से वापस आने का रास्ता मुझे भी ना पता हो।
वजह कोई नहीं हैं। मुझे नहीं पता। बिना बात के मन बहुत खराब हैं। बहुत कुछ कहना चाहती हूं पर नहीं कह पा रही ।
दिमाग में बहुत उलझने पता नहीं किया किया चल रहा हैं।
किया करू कहा जाऊ कुछ समझ नहीं आ रहा।
डर घबराहट लग रही है । कुछ गलत होने वाला है या कुछ गलत ना हो जाएं। वैसे भी 2025 लाइफ़ का सबसे डरावना दर्दनाक चैप्टर रहा हैं। 2025 में जो हुआ ना सोचते हुए भी सोचने लगती हूं फिर सोचकर फिर डर घबराहट होने लगती हैं । कही फिर से........🥹🥹🥹 किसी से डिस्कस नहीं कर सकतीं किसी से कुछ नहीं कहे सकती किसी को कुछ नहीं बता सकती ।
आज बहुत कुछ हैं लिखने को पर किया करू नहीं कहे पा रही नहीं बता पा रहीं......
कोशिश कर रही हूं नॉर्मल हो जाऊं।
Take Care
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